रूबरू | Part 28 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
ताबिश के हर बढ़ते कदमों के साथ मायरा के दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी।
मायरा के पास जाकर ताबिश रूक गया।
कमरे में मुकम्मल सन्नाटा छा गया।
तुम्हें चाय क्यों नहीं पीना? ताबिश अपने बेकाबू होते दिल को संभाल गया।
मैंने बताया तो मुझे नींद नहीं आती फिर।
मुझसे भाग रही हो? ताबिश सीधा उसकी आंखों में देखता है।
मैं भागने वालों में से नहीं...मायरा की निडरता वापस आ गई।
अच्छा... ताबिश हल्के से हंस पड़ा।
जाओ चेंज करके दादी के रूम में आओ। मैं इंतेज़ार करूंगा।
ताबिश की बात खत्म होते ही वह बाहर निकल कर सीधे अपने रूम में चली गई।
और ताबिश वहीं पर खड़ा अपने रवैए पर गौर करने लगा।यह मुझे क्या हो रहा है। मैं क्यों इसका साथ चाह रहा हूं।
यह यहां क्यों आई है? हम नहीं जानते। यह हमारी दुश्मन भी हो सकती है।
मुझे इसकी तरफ बढ़ते अपने कदमों को रोकना होगा। मैं इस तरह एक अंजान लड़की के लिए अपने दिल के खूबसूरत जज़्बात बर्बाद नहीं कर सकता।
मन में फैसला लेता वह अपने कमरे की ओर बढ़ गया।
मायरा चेंज करके दादी के रूम में चली गई। उसी वक्त सगीरा चाय लेकर आ गई।
यह एक ही चाय क्यों लेकर आई हो?...दादी एक कप चाय देखकर बोलीं।
ताबिश सर की चाय उनके कमरे में दे दिया है। और उन्होंने मायरा मैडम की चाय के लिए मन कर दिया था।
ठीक है, तुम जाओ।
जाओ मायरा तुम भी अपने कमरे में जाओ। यहां क्यों आई हो? दादी हैरानी से उसे देखती हैं।
ऐसे ही दादी आप से बात करने के लिए आई हूं। अब वह दादी को क्या बताती कि यह उनके पोते का हुक्म था। जिसे मानना उसका फर्ज़ था।
वैसे भी कल वह गलती करके पछता रही थी। अब और वह ताबिश का मूड़ खराब नहीं करना चाहती थी।
दादी यह सादिका खाला कौन हैं? मुझे इनके बारे में बताएं। मायरा दादी के बेड पर उनके पास बैठ गई।
सादिका मेरे मामा की बेटी है। मेरा ननिहाल अभी भी गांव में रहता है। सारे बुज़ुर्ग गांव में रहते हैं। और बच्चे शहर में।
बच्चे पढ़ाई की वजह से शहर आ गए। और फिर पढ़ाई के बाद यहीं नौकरी करने लगे।
सादिका के शौहर वहीं गांव में टीचर हैं। शफकत भी शहर से पढ़ाई करके वहीं गांव में टीचर बन गई।
उसका रिश्ता शहर में रह रहे उसके भाई के दोस्त से आया। जो कि हर लिहाज़ से अच्छा रिश्ता था। लेकिन वह लोग शहर में शादी करना चाहते थे।
सादिका इस बात को लेकर परेशान थी। तब मैंने उसे पुरानी हवेली से शादी करने का मशवरा दिया। जो उसे सही लगा।
इस तरह यहां से शादी की बात सुनकर उसके ससुराल वाले भी बहुत खुश हुए।
ब्लैक स्टोन के रिश्तेदार होना कोई मामूली बात नहीं।
हम शफकत की शादी किसी बड़े होटल से भी कर सकते थे। लेकिन सादिका और उसके शौहर कभी इस बात के लिए तैयार न होते। इसलिए मैंने हवेली की बात की।
शादी का सारा खर्च हम उठा रहे हैं। लेकिन इस बात की किसी को कानों-कान खबर नहीं।
हम लोग कोई काम दिखा कर नहीं करते। जिसे हम अपना समझ लेते हैं। और जो हमारे लिए वफादार होता है। हम उसके लिए कुछ भी कर गुज़रते हैं।
पहले हम लोग उसी हवेली में रहते थे। लेकिन जब यह हवेली बन गई तो हम यहां रहने लगे।
वह हवेली वैसे भी बन्द ही रहती थी।
यह शादी मेरे लिए बहुत खास है। मैं नहीं चाहती कि इसमें कोई कमी हो।
मायरा चुपचाप बैठी दादी की बातें सुन रही थी। आज के ज़माने में कौन इस तरह किसी के बारे में सोचता है।
आकिल भी तो इन सब की बहुत तारीफ करता था। हर वक्त आकिल का बॉस उसे कुछ न कुछ देता रहता।
लेकिन आकिल की मौत तो तुम लोगों की वजह से ही हुई। अचानक से मायरा के मन में उनके लिए कड़वाहट घुल गई।
दादी आप आराम करें। मैं भी सोने जा रही हूं। मायरा एक झटके से उठ गई।
सुनो मायरा...
जी, मायरा दादी की ओर देखती है।
कभी भी किसी के बारे में कोई गलत राय तब तक कायम मत करना। जब तक कि उस इंसान के बारे में अच्छे से जान न लो।
दादी उसकी ओर देखती हैं।
आप ऐसा क्यों कह रही हैं?
मायरा हैरान हुई।
क्या दादी को उसके इरादों का पता चल गया है?...
तुम मुझे दादी कहती हो। उसी रिश्ते से यह एक नसीहत समझ कर याद रखना।
जाओ अब आराम करो।
दादी लेट कर आंख बंद कर लेती है। इसका मतलब अब वह कोई बात नहीं करना चाहती।
मायरा खामोशी से बाहर निकल गई। शायद वह दादी से कुछ और बात करना चाहती थी। लेकिन दादी ने उसे मौका नहीं दिया।
कोई बात नहीं दादी...आज आपने भले मुझे आगे बात करने का मौका न दिया हो। लेकिन मैं अगर बात करना चाहूं तो ऐसे मौके बहुत आसानी से बना सकती हूं।
आप मायरा को नहीं जानती। मायरा जब कुछ करने का ठान लेती है तो फिर कोई रोक नहीं सकता।
मैं अपने मकसद के बहुत करीब हूं। एक बार आपके पोते दानिश सरफराज़ से मिल लूं। फिर मैं बताती हु कि मैं क्या हूं।
मन ही मन बातें करते हुए वह बाहर निकल गई। बाहर निकल कर भी उसका मन बहुत बेचैन था।
वह दादी के कमरे में इसलिए रूकी थी कि अगर ताबिश आया। और वह न रही तो वह गुस्सा न हो।
लेकिन उसे बुलाकर वह खुद नहीं आया।
उसके न आने की क्या वजह हो सकती है।
मुझे नहीं पता।
लेकिन मिस्टर ताबिश आपके न आकर एक बार फिर यह जता दिया कि मैं नौकर हूं और आप मालिक...
आपको कुछ भी करने का अधिकार है। और हम जैसे नौकरों को सिर्फ हुक्म मानने का अधिकार है। उससे ज़्यादा और कुछ नहीं।
आकिल के साथ भी तो आप लोगों ने यही किया। उसने हमेशा आप लोगों की गुलामी की। और बदले में आपने उसे वह सब दिया। जो आप दे सकते थे।
लेकिन जैसे ही बात ज़िंदगी पर आई। आपने अपनी ज़िंदगी बचा ली। और उसकी कुर्बान कर दी।
इसी एक गलती का हिसाब लेने मैं ब्लैक हाउस तक आई हूं।
मेरा सवाल आप लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेगा।
मायरा अपनी सोचों में घिरी सोचते हुए बाहर लॉन में चली गई।
लॉन में जाते ही उसे दूर से ताबिश दिख गया। जो वहां पर टहल रहा है।
वह अंदर की ओर वापस मुड़ जाती है।
मायरा...तभी ताबिश उसे आवाज़ देता है।
अंदर जाने का इरादा छोड़ कर वह वापस ताबिश की ओर बढ़ जाती है।
जारी है...
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